लखनऊ, विशेष संवाददाता लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) में ठेकेदार ने 10 फीसदी से ज्यादा कम दरों पर टेंडर डाला तो उसपर जुर्माना लगाया जाएगा। टेंडर 15 फीसदी से कम दर पर डालने पर सड़क की गुणवत्ता की जांची होगी और गड़बड़ी पर ठेकेदार को दो साल के लिए डिबार कर दिया जाएगा। खराब गुणवत्ता वाला टेंडर निरस्त कर नए सिरे से निविदाएं मांगी जाएंगी। विभाग ने बिलो टेंडर पर लगाम लगाने के लिए नीति तैयार करके इस पर आपत्तियां व सुझाव मांगे हैं। लोक निर्माण विभाग में बीते आठ-नौ साल से डाले जा रहे टेंडर की दरें मानक से काफी कम आ रहे थे।
तीन-चार सालों में 40 से 45 प्रतिशत कमी देखी गई। गुणवत्ता की जांच में अव्यवहारिक दरों पर टेंडर लेने वालों के कामों में काफी खामियां मिली, जिसपर ठेकेदारों को काली सूची में डाला गया। इंजीनियरों पर कार्रवाई की गई। बीते एक साल में प्रदेश में 72 ठेकेदारों को काली सूची में डाला गया। लोनिवि विभागाध्यक्ष अशोक कुमार द्विवेदी कहते हैं कि बिलो टेंडर डालने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही थी। इससे विभाग को काफी नुकसान को हो रहा था। जो काम छह महीने में होने चाहिए, वे साल-डेढ़ साल में पूरा हो रहा था। लिहाजा, अन्य प्रदेशों में काम की गुणवत्ता और बिलो टेंडर की प्रवृत्ति से निपटने की नीति का अध्ययन किया गया। बिहार, ओडिशा और झारखंड समेत अन्य प्रदेशों की नीतियों के आधार पर यह नीति बनाई गई है। ली जाएगी अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी एके द्विवेदी ने बताया कि 5 करोड़ से कम या अधिक लागत के कामों में अगर कोई ठेकेदार 10 प्रतिशत से अधिक कम दर पर टेंडर डालता है, तो जुर्माना लगेगा। निविदाओं की अनुमानित लागत और निविदा लागत के अंतर के आधार पर चरणबद्ध रूप से अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी जमा कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि 15 प्रतिशत से कम दरों पर अगर टेंडर डाले जाते हैं तो उस सर्किल में सबसे कम दर पर डाले गए टेंडर के काम की गुणवत्ता जांची जाएगी। किसी दूसरे सर्किल का अधीक्षण अभियंता जांच करेगा। एक समान दरें पाए जाने पर जिस ठेकेदार की बिड क्षमता ज्यादा होगी, उसे न्यूनतम माना जाएगा।
ये लाभ होंगे – कार्य में विलंब, विवाद, कानूनी प्रकरण व अन्य जटिलताएं खत्म होंगी – अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा पर प्रभावी रोक लगेगी – सक्षम, अनुभवी और पर्याप्त बिड कैपेसिटी वाले ठेकेदारों का चयन होगा – निविदा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी – ठेकेदारों की जवाबदेही तय होगी — शर्तें माननी होंगी ठेकेदारों को – पांच करोड़ से कम लागत की निविदाओं के मामले में दूसरे विभागों में किए गए कामों का संज्ञान नहीं लिया जाएगा। – पांच करोड़ से ज्यादा लागत के कामों में निविदा डालते वक्त ही ठेकेदार को दूसरे विभागों में किए जा रहे काम आदि का ब्योरा दिया जाएगा। – अगर दूसरे विभाग में पांच करोड़ से ज्यादा लागत के काम बिड खुलने की तारीख से दो साल पहले पूरे हुए हों तो उस काम का गुणवत्ता प्रमाण पत्र देना होगा।
दूसरे विभागों में पांच करोड़ से ज्यादा लागत के निर्माणाधीन या दो साल की अवधि के भीतर पूरे किए गए काम को विभाग से छुपाने पर ठेकेदार को दो साल के लिए डिबार कर दिया जाएगा। – ठेकेदार अगर अन्य विभाग में पांच करोड़ से ज्यादा काम नहीं कर रहा है या दो साल में उसने पांच करोड़ से ज्यादा का काम नहीं किया तो 15 प्रतिशत से अधिक कम दरों पर निविदा डाले जाने पर अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी दिया जाना अनिवार्य होगा। – अगर ठेकेदार दूसरे विभागों में समय से काम पूरा न होने पर दंडित हुआ है तो उसे अपात्र घोषित कर दिया जाएगा। – दूसरे विभाग के काम छुपाने की शिकायत होने पर अगर ठेकेदार 48 घंटे के भीतर जवाब नहीं दे पाता है तो उसकी बिड समाप्त कर दी जाएगी।


